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Dhruv Jaisi Siddhi ध्रुव जैसी सिद्धि

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हमारे देश में कई वीर और विशिष्ट बालक हुए हैं. जैसे  अर्जुन, एकलव्य,प्रहलाद आदि. ये बालक अपने लक्ष्य को पाने हेतु किये गए प्रयासों के लिए आज हमारे लिए दृष्टांत बन गए हैं. ध्रुव  की साधना तथा लक्ष्य सिद्धि की कथा बहुत ही प्रेरणादायक है.


ध्रुव के जीवन चरित्र को लेकर श्री चन्द्रशेखर पाण्डेय ‘चन्द्र्मणी’जी ने बड़ी ही सुंदर कविता लिखी है. जिसे कल्याण के बालक अंक में छपा गया है. मैंने चन्द्रमणि जी की कविता साभार लिया है. यह कविता इस प्रकार है -

(1) “जन्म ही हुआ था जिसका तपोवनों के बीच, वनवासियों ने  सूतिका - गृह   संवारा था शीतल-सुगंध-मंद  मलय    समीर   द्वारा दोलित   लताओं   ने  समोद पुचकारा था यद्दपि   न  पाया  मोद   पितृ   गोद   का, परन्तु माता करूणामयी ने प्रेम से दुलारा था प्यारा था सभी को प्राण से भी वह बाल ध्रुव,  संतत-सुनीति-नयनों का बना तारा
 (2)
आया था बुलाने से पिता की गोद में बैठने को, किन्तु हा ! विमाता का कतु-वचन सुनना पड़ा वचन नहीं,   बाण थे,  हुए हिय के पार, अन्तर की वेदना से सिर धुनना पड़ा || आन का महान अपमान हो गया था, इस हेतु चिन्तन में कुछ और गुनना पड़ा | ध्रुव नाम सार्थक बन…