The Colour Festival Holi रंगों का त्योहार होली

होली एक बहुत ही पावन और सरस पर्व है. क्या बच्चे, क्या बूढ़े, क्या नर, क्या नारी, होली में सभी मस्त रहते हैं. होली सिर्फ रंगों का पर्व ही नहीं, भक्ति का पर्व भी है. होली हर वर्ष आती है और हमें यह बताकर चली जाती है कि हरि भजन या ईश्वर की आराधना में क्या शक्ति होती है.

आप सभी प्रह्लाद की कथा से वाकिफ होंगे कि किस प्रकार प्रह्लाद को मारने के उपाय किये गए, लेकिन ईश्वर की कृपा से उसे कुछ भी नहीं हुआ और वह हर बार बचता चला गया. अंत में उसके पिता का वध करने के लिये भगवान विष्णु को नरसिंहावतार लेना पड़ा.

बुरा न मानो होली है 

यूँ तो होली हर उम्र के लोग आनंदपूर्वक खेलते हैं, लेकिन बचपन की होली सबसे बेहतरीन होती है. होली फाल्गुन महीने के पूर्णिमा को मनाया जाता है. लेकिन उसके एक दिन पहले छोटी होली मनाई जाती है, जिसे होलिका दहन भी कहा जाता है. पश्चिमी उत्तर प्रदेश और अन्य भागों में इसे गोवर्धन पूजा के रूप में भी मनाया जाता है, क्योकि उसी दिन भगवान श्रीकृष्ण ने गोकुल के लोगों को देवराज इंद्र के प्रकोप से बचाया था.

हमलोग बचपन में होलिका दहन के दिन शाम को इस इंतज़ार में रहते थे कि माँ के हाथों से कचौरी-फुलौरी, दहिवाडा आदि बनाया जाता था और हमलोग मजे लेकर खाते थे. होली वाले दिन सुबह उठते ही शरीर में नयी उर्जा का संचार होने लगता था. आज तो बहुत मजा आएगा. सुबह धुप निकालते ही अपने दोस्तों  के साथ खेलने चले जाते. पानी का बौछार शुरू हो जाता. हम होली खेलने के लिये टीम बनाकर चलते और आते जाते लोगों पर पानी और रंगों का बौछार कर देते थे. यह सब क्रम 10-11 बाजे तक चलता, फिर माँ का बुलावा आ जाता,

 हम लोग घर आकर नहा धोकर तैयार हो जाते. माँ के हाथों से बना गुजिया, पुआ, पकवान आदि खूब मजे ले लेकर खाते. हमारा इंतजार रहता कि कब दो बजे और फिर गुलाल वाली होली शुरू करें. हमें नए कपडे मिलते बिलकुल सफ़ेद. कुरते की जेब में गुलाल रखकर निकला पड़ते होली खेलने – रंग बिरंगे गुलाल वाली होली, असली होली. बहुत मजा आता था. हमारे घर में एक बाल्टी में रंग रखा जाता था और उसमें एक पिचकारी. हम आते जाते लोगों के कपडे को रंगीन बना देते थे. यदि निशाना चुक जाता तो जल्दी जल्दी पिचकारी में रंग भर दुबारा रंग फेंकते, लेकिन रंग डालकर ही छोड़ते थे.

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कभी कभी माँ कहती हाथ मुँह और पैर में पेराशूट नारियल तेल लगाकर बाहर जाओ, इससे रंग त्वचा को नहीं पकड़ेगा. वाकई यह बहुत ही कारगर फार्मूला था.

आह! कितना मजेदार था बचपन की होली! उन्मुक्त, निर्द्वंद, स्वछन्द!


“I’m pledging to #KhulKeKheloHoli this year by sharing my Holi memories atBlogAdda in association with Parachute Advansed.”

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