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Showing posts from February, 2016

Traditional Music of Rural India Hindi Essay

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ग्रामीण भारत का पारंपरिक संगीत हिंदी आलेख
ग्रामीण भारत के पारंपरिक संगीत पर लिखने से पहले इसके बारे में यह जान लेना बहुत जरुरी है कि इसके कई स्तर हैं, कई रूप हैं और कई प्रकार हैं. सबसे पहले पारम्परिक संगीत हर ऋतू और हर पर्व त्यौहार से जुड़ा होता है. हम जनवरी महीने से शुरू करें तो सबसे पहले 26 जनवरी आता है, इस मौके पर तो ज्यादातर फ़िल्मी देशभक्ति गीत स्कूल के बच्चे गाते हैं लेकिन कुछ पारंपरिक संगीत भी हैं जो देशभक्ति से जुड़े होते हैं.
वसंत पंचमी में सरस्वती माता के बहुत सारे लोक भजन गाये जाते हैं. एक सबसे बड़ा बदलाव आया है वह यह है कि हर दो चार गाँव पर एक कीर्तन मण्डली होती है जो विभिन्न आयोजनों पर अपनी प्रस्तुति देते हैं. कुछ मूल भजन के साथ ही साथ ये मण्डली कुछ पैरोडी भी तैयार करते हैं जो तत्कालीन लोकप्रिय फ़िल्मी गीत पर आधारित होता है. यह सुनने में बहुत ही लोकप्रिय होता है और युवा वर्ग इसे विशेष रूप से पसंद करते हैं. वसंतपंचमी के बाद होली गायन शुरू हो जाता है. होली का पर्व एक सरस पर्व हैं. होली से सम्बंधित एक से बढ़कर एक लोकसंगीत जनमानस में रचे बसे हैं. जोगीरा, फाग, धमाल, चौताला, भजन, ठुमर…

MGNREGA and Its Impact on Rural Employment

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जैसा कि आपको पता है कि MGNREGA कोMahatma Gandhi National Rural Employment Guarantee Act के नाम से जानते हैं. यह भारत सरकार की बहुत ही महत्वाकांक्षी परियोजना रही है.

जैसा कि हम सबको मालूम है कि महात्मा गांधीऐसा मानते थे कि भारत की आत्मा गांवों में बसती है। वे ग्रामीण अर्थव्यवस्था की आत्मनिर्भरता, स्वशासन की वकालत किया करते थे। गांधीजी ने स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान खादी और चरखे का प्रचलन ग्रामीण अर्थव्यवस्था की सुदृढ़ता और स्वनिर्भरता को ध्यान में रख कर किया। आज की स्थिति वैश्वीकरण के साथ विकास की है। तीव्र गति से आर्थिक विकास के नए आयामों को गढ़ा जा रहा है। परंतु इस विकास के साथ भारी असमानता भी दिखाई पड़ती है। ग्रामीण-शहरी, अमीरी-गरीबी के बीच का अंतर व्यापक रूप से दिखता है। आज ग्रामीण क्षेत्र विकास की राह पर शहरों जैसा दौड़ पाने में लाचार बने हुए हैं। इस लाचारी को दूर करने के लिए ग्रामीण विकास मंत्रालय ने कई अहम पहल की हैं। पीयूआरए, मनरेगा, ग्रामीण विद्युतीकरण, प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना, स्वरोजगार कार्यक्रम, आधारभूत संरचना निर्माण सहित ऐसी कई योजनाएं ग्रामीण विकास व रोजगार वृद्धि …

Some Fantastico Use of Beetroot in Hindi

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चुकंदर के कुछ बेहतरीन प्रयोग
आयुर्वेद के अनुसार चुकंदर का दो -तीन कतरा सलाद के रूप में नियमित खाते रहने से शरीर कई बीमारियों से लड़ने में सक्षम हो जाता है। गर्भवती महिलाओं को इसका जरुर सेवन जरूर करना चाहिए। गर्भावस्था के दरम्यान आमतौर पर खून की कमी की समस्या हो जाती है, जिसे एनीमिया या रक्ताल्पता कहा जाता है। जो महिलाएं चुकंदर का नियमित सेवन करती हैं, उन्हें रक्ताल्पता की समस्या का सामना नहीं करना पड़ता है। कई बार बच्चे भी रक्ताल्पता के शिकार हो जाते हैं। वे अक्सर बीमार रहने लगते हैं। ऐसे बच्चे यदि चुकंदर का जूस पियें तो लाभकारी रहता है। यह अमारैन्थ परिवार का एक पादप सदस्य है। यह कई रूपों में पैदा होता है। यह एक तरह की जड़ है। आमतौर पर यह लाल रंग का होता है। कुछ स्थानों पर सफेद चुकंदर भी पाए जाते हैं। इसके पत्ते को शाक के रूप में प्रयोग किया जाता है।


चुकंदर के कुछ औषधीय गुण निम्नलिखित हैं:
चुकंदर एनीमिया को दूर करता है :एनीमिया के लिए चुकंदर रामबाण माना जाता है। चुकंदर में पर्याप्त मात्रा में आयरन, विटामिन और मिनरल्स होते हैं, जो खून को बढ़ाने और उसे साफ करने का काम भी करते हैं। यही …