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Showing posts from September, 2015

Home Makeover with Multiple Colours #PaintFinder

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Home is a place where we all like to live peacefully. Everyone tries to make his or her home a happy place to live in. I also believe to have a clean and colorful house. When it comes to chose the wall and ceiling color; for me it is always difficult find the right choice. When a color suits me it does not suit other family members. But this is a thing which must be resolved with majority. Everyone tries to find out the solution. People look for colorful catalog of different paint manufacturing company. If you chose a color, the sales people will say, this particular color is not available right now. Some other similar shade will work. So these are the little things which make you unusual. Either the thought to compromise is appear or you think that let it go, I will change the color of the wall on next Deepawali.


But here comes a very novel concept of color - #PaintFinder.
This website is self sufficient to provide you all types of color solution rather more than you think. As the comp…

सच्ची सलाह सफलता का द्वार

यूँ तो जीवन में हर हमेशा सुधार की गुंजाइश रहती है और लोगों को निरंतर अपने व्यक्तित्व के विकास पर धयान भी देना चाहिए. चाहे यह स्वास्थ्य से जुड़ा हो या परिवार से, या व्यवहार से, या फिर नौकरी से. ऐसे तो हर किसी को किसी न किसी रूप में लोग सलाह देते रहते हैं लेकिन मैं यहाँ एक #SachchiAdvice का जिक्र करना चाहूंगी जिसने वाकई मेरे छात्र जीवन में परिवर्तन ला दिया. जब भी मैं परीक्षा देती, परीक्षा परिणाम आने के बाद मेरे अंक उतने अच्छे नहीं आते जितना मैं सोचती. मैं मन ही मन सोचती-मैंने लिखा तो सब कुछ था, याद भी किया था फिर मेरे अच्छे अंक क्यों नहीं आते. मैंने यह बात अपने सी एच सर को बताई. उन्होंने मुझे एक सलाह दी. जब भी तुम एग्जाम देने जाओ, अपने साथ घडी जरुर ले जाओ. हर आधे घंटे पर घडी देखो और यह देखो कि तुम्हारी गति सही चल रही है कि नहीं. अंतिम के 10  मिनट बचा कर रखो. इस दस मिनट में तुमने अपनी उत्तर पुस्तिका में क्या लिखा है यह एक बार ध्यान से देखो. अपने द्वारा लिखे गए उत्तर को एक बार पुनः देखने से यह पता चल जाता है कि कोई प्रश्न छूट तो नहीं गया और कुछ इस तरह की गलतियाँ दीख जाती हैं जिसे तुम्हे स्…

टाटा स्काई प्लस ट्रान्सफर के साथ ले पूरा आनंद टीवी का

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आज के माहौल में टीवी  को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता. घर के सभी सदस्यों को टीवी देखना अच्छा लगता है. बच्चे स्कूल से आते ही सोफे पर लेट जाते हैं और रिमोट की मांग करने लगते हैं. कार्टून जो देखना है उन्हें! देना ही पड़ता है आखिर पूरे दिन स्कूल में पढाई के बाद थोडा मनोरंजन तो चाहिए ही उन्हें. 
घर के बड़ों का एक अपना टाइम होता है, शाम को पतिदेव ऑफिस से आते हैं तो प्राइम टाइम उनका. न्यूज़ देखना है, डिबेट सुनना है या फिर डिस्कवरी या बीबीसी देखना है. ऐसे में मुझे लगता है कि मैं बहुत कुछ मिस कर रही हूँ.  मेरे सीरियल जो मुझे बहुत अच्छे लगते हैं; जैसे कुमकुम भाग्य, सतरंगी ससुराल, साथ निभाना साथिया, स्वरागिनी, सुमित संभाल लेगा, डोली अरमानों की, जमाई राजा. इन सीरियल को मिस कर जाती हूँ तो लगता है यह आधा- अधूरा मनोरंजन कब तक चलेगा. बहुत कुछ समझौता करके चलना पड़ता है. अमिन मन ही मन सोचती काश यह सब मोबाइल या तब पर आता तो मैं चुपचाप अपने स्मार्ट फ़ोन पर यह सब कुछ देख लेती. 

खैर मेरी मन की इच्छा पूरी हुई. जब से टाटा स्काई प्लस ट्रान्सफर का सेट टॉप बॉक्स आया है, मैं अपने मनोवांछित सीरियल को रिकॉर्ड कर अपने मोबाइ…

तेघड़ा का भगवान श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव मेला ऐतिहासिक

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तेघड़ा ( बेगूसराय) का भगवान श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव मेला ऐतिहासिक है। देश भर में दूसरा सबसे बड़ा मेला का आयोजन यहां किया जाता है। इस मेले का भी गौरवमयी इतिहास रहा है। तेघड़ा में मेले का आयोजन प्रत्येक वर्ष धूमधाम से होता है। मेला तीन दिनों तक चलता है। इसमें आसपास के क्षेत्रों से हजारों लोग यहां पहुंचते हैं। 
भयंकर महामारी की चपेट में था तेघड़ा : वर्ष 1927 में तेघड़ा में प्लेग की बीमारी भयंकर महामारी के रूप ले ली थी। सैकड़ों की संख्या में लोग प्लेग से मारे गय थे। महामारी के कारण तेघड़ावासी बाजार छोड़ कर गांवों में जाकर बसना शुरू कर दिया था। कई लोग तेघड़ा छोड़कर दूसरे शहरों एवं राज्यों में जाकर बस गए थे। 
प्लेग की महामारी में मारे गये थे सैकड़ों लोग श्रीकृष्ण की आस्था और भक्ति से मिला था निजात अभी दस किलोमीटर परिक्षेत्र में 14 मंडपों में मेला का आयोजनमहामारी से बचने के लिए किया था यज्ञ अनुष्ठान : प्लेग की इस भयंकर महामारी से बचने के लिए लोगों ने काफी उपाय किए। बड़े-बड़े यज्ञ और अनुष्ठान किया। नामी वैद्यों को बुलाया गया। लोग परेशान होकर भगवान की पूजा करने लगे थे।
1928 में पहली बार मनाया गय…