शहद – एक प्राकृतिक मिठास स्रोत

शहद भी मीठा, चीनी भी मीठा. फिर दोनों में क्या अंतर है? कहने को तो दोनों मीठा होता है लेकिन दोनों में बहुत ही व्यापक अंतर है. शहद चीनी की तुलना में स्वास्थ्य के लिए अधिक अनुकूल है. चीनी में सिर्फ ग्लूकोज  होता है जबकि शहद में ग्लूकोज , फ्रूकटोज, स्टार्च फाइबर, विटामिन एवं अन्य खनिज तत्व भी पाए जाते हैं. Honey Diet हमारे भोजन को संतुलित बनाता है. Honey is an essential component to make our food balanced.  आखिर शहद में वह क्या खासियत है जिसकी वजह से इसे हमें अपने भोजन अंग बनाना चाहिए.



शहद त्वचा को कांति प्रदान करता है. यह एक एंटीऑक्सीडेंट है. एंटीऑक्सीडेंट हमारे शरीर के प्रतिरोधी क्षमता को बढाता है.  
गरमी में तरबूज और शहद को मिलकर जूस का सेवन किया जा सकता है. एक चौथाई भाग तरबूज लें. उसका बीज निकालकर मिक्सी में पीस लें. पुदीना के कुछ पत्ते मिला दें. अदरक भी मिला सकते हैं. शहद मिलाकर उसे इस्तेमाल करें.
शहद और नीबू के रस को बराबर भाग में मिला लें. दिन में दो बार,  20 मिनट तक अपने चेहरे या त्वचा पर लगाकर रखें. इससे चेहरे पर काले रंग के निशान दूर हो जाता है. 
शहद के प्रयोग का प्रमाण 4000 साल पुराना है. मेसोपोटामिया की सभ्यता में शहद के मिलने का प्रमाण है. हिन्दू पूजा पाठ में शहद का प्रयोग अनिवार्य रूपा से किया जाता है. चीनी तुलना में शहद का शर्करा स्तर (GI Index ) कम होता है. शहद का उत्पादन चूँकि honeybees द्वारा परागण क्रिया द्वारा किया जाता है इसलिए इसमें मिलावट की कोई सम्भावना नहीं रहती. अगर अच्छे ब्रांड का शहद लिया जाय तो उसका उपयोग हमारे भोजन को सम्पूर्ण बना देता है. 
यदि किसी को अपच की समस्या है तो उसे यह नुस्खा अपनाना चाहिए. अदरक के छोटे छोटे टुकड़े  करें. अदरक को काटने से पहले उसके छिलके उतार लें. अब उन टुकड़ों को एक कांच के बोतल में रखे शहद में डुबाकर रख दें. कांच के बोतल के मुंह को कपडा से बांधकर 12 -15 दिन धुप में सुखाएं. सुबह शाम 2 -4 टुकड़ों के सेवन करने से अपच की बीमारी ठीक हो जाती है. 
शहद का एक अन्य प्रयोग जो कि ठण्ड के दिनों में होनेवाली एलर्जी में बहुत उपयोगी है. नीम की पत्तियों को पीसकर गोली बना लें. अब उस गोली को सुबह सुबह शहद में डुबोकर खाली पेट खाएं. इसे लेने के एक घंटे बाद तक कुछ भी नहीं लें. यह ठण्ड में होनेवाली एलर्जी में बहुत उपयोगी है. 
कहा गया है शहद एक गुण अनेक.  आयुर्वेद और सिद्ध  पद्धति में शहद को एक महत्वपूर्ण घटक माना  जाता है. इसलिए सबसे बेहतर विकल्प है कि आप इसे अपने दैनिक आहार का हिस्सा बनायें. इस प्रकार शहद के दैनिक और लगातार सेवन से शरीर को निरंतर ऊर्जा मिलती रहेगी. शरीर निरोग होगा. पाचन तंत्र मजबूत होगा. आलस्य दूर होगा, काम करने में मन लगेगा. तनाव मुक्त रहकर आप अपने परिवार की देखभाल अच्छी तरह से कर पाएंगे. इसलिए शहद का सेवन नियमित करें और निरोग रहें. धन्यवाद!

Comments

Popular posts from this blog

तेल मालिश सही पोषण के लिए बहुत जरुरी!

देशाटन से लाभ