उनकी प्रेरणा मेरा संबल

आज मैं बहुत उदास हूँ. पता नहीं क्यों ऐसा लग रहा था कि कुछ न करूँ. चुपचाप बैठी रहूँ. बच्चों को स्कूल भेज दिया था. पति भी अपने ऑफिस के काम से बाहर गए हुए थे. मन बेचैन हो रहा था. कुछ भी अच्छा नहीं लग रहा था. साँस की तकलीफ तो पहले से थी लेकिन उस दिन पता नहीं क्यूँ जैसे लग रहा था कि आज थोडा ज्यादा परेशान कर रहा है. अपने घर में अकेली चुपचाप बैठी थी. बड़े शहरों में सबसे बड़ा साथी टी वी होता है. टी वी ऑन किया. कभी सास बहू के सीरियल को ट्यून किया तो कभी कंप्यूटर चलाया. फेसबुक, ट्विटर सबको आजमा के देखा. लेकिन पता नहीं क्यों आज सब बेकार लग रहा था. मन में बहुत बुरे बुरे ख्याल आ रहे थे. मन आशंकित लग रहा था. पति भी बाहर ही थे. जीवन नीरस लग रहा था. इसी तरह के उलटे पुल्टे ख्याल मन में आये जा रहे थे. सोच रही थी क्या करूँ.


तभी मेरे दरवाजे पर लगी घंटी बजी. मैंने देखा कि दरवाजे पर मेरी सहेली मोना और गरिमा खड़ी हैं. मैंने जैस ही दरवाजा खोली, दोनों मुझसे लिपट गयी. What a pleasant surprise! मैंने कहा. मोना ने मुझे देखते ही कहा – क्या बात है तुम इतनी परेशान क्यों दिख रही हो? मैं झेप गयी और कहा – नहीं ऐसी कोई बात नहीं है. फिर गरिमा ने कहा – क्या यार! क्या बात करती हो! यह जरुर है कि हम बहुत दिनों बाद मिल रहे हैं, लेकिन मैं तुम्हारा शकल देख के बता सकती हूँ कि तुम अभी परेशान हो. उसने फिर कहा – देखो हम दोनों मिलके कैसे तुम्हरे मन की नेगेटिविटी को दूर करती हूँ. इसी बीच मैं उनके लिए चाय बनाने लगी तो दोनों भी किचन में आ धमकी और हमारे स्कूल और कॉलेज के दिनों का जिक्र करने लगी. जब उसने हमारे प्रेंक के बारे में बताना शुरू किया कि किस तरह से हम एक दूसरे के साथ प्रेंक किया करते थे. तो मेरी हंसी छुट गयी. कॉलेज में जब हम स्काउट के लिए गयी तो मेरी दोनों सहेली भी साथ थी. हमने खूब बातें की. खूब हँसे. मैंने मन ही मन सोचा – अभी कुछ देर पहले मेरे मन इतने बुरे -बुरे ख्याल आ रहे थे. जीवन नीरस और बेकार लग रहा था, लेकिन मेरी दोनों सहेलियों ने मेरे अन्दर , मेरे मन में नव उर्जा का संचार कर दिया. मेर अन्दर की सारी नेगेटिविटी को दूर कर दिया, हाँ, यह सच है जब हमारे मन में नकारात्मक विचार आते हैं तो हम बेकार की बातें सोचने लगते हैं. और जैसे की कोई पॉजिटिव थॉट वाला इन्सान हमारे सामने आता है वह हमें मोटीवेट कर देता है और हम फिर हम सकारात्मक बातें सोचने लगते हैं. मैं उस दिन मोना और गरिमा की उपस्थिति की वजह से बहुत हंसी बल्कि यूँ  कह सकती हूँ कि ज़ोर ज़ोर से खिलखिला कर हंसी. हँसना हीलर की तरह काम करता है. इसलिए जीना जरुरी है तो हंसना भी जरुरी है. हँसे और खूब हँसे. हंसने का कोई भी अवसर न गवाएं.

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