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Showing posts from March, 2015

छोटी –छोटी बातों में ख़ुशी

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ख़ुशी मन की एक अवस्था का नाम है. ख़ुशी, क्रोध, घृणा, ईर्ष्या, आदि मन के अनेक भाव होते हैं जो समय परिस्थिति, दशा, आदि अनेक बातों पर निर्भर करते हैं. ख़ुशी के बहुत सारे कारण हो सकते हैं. जब किसी को कामयाबी मिलती है, वह खुश हो जाता है. ज्यादातर लोग अपनी तारीफ सुनकर खुश हो जाते हैं. कुछ लोग नाच देखकर खुश होते हैं तो कुछ लोग अपना मनपसंद खाना खाकर खुश हो जाते हैं. आजकल के युवा विभिन्न पेय पदार्थ जैसे कोकाकोला, आदि पीकर खुश हो जाते हैं.  अर्थात खुश होने के हजारों वजह हो सकते हैं.
HAPPINESSप्रस्तुत पोस्ट में मैं इस बात का जिक्र करना चाहती हूँ कि वो कौन सी छोटी छोटी बातें हैं जो मुझे ख़ुशी देती हैं. जब मेरे बनाये गए खाने की तारीफ होती है, मुझे बहुत ख़ुशी होती है. जब कोई मेरे घर आता है और मेरे घर की साफ़ सफाई की तारीफ करता है तो मुझे ख़ुशी होती है. जब मुझे कोई प्रेम पूर्वक कोई काम करने का आग्रह करता है, तो मुझे उस काम को करने में बहुत ख़ुशी मिलती है. मुझे पौधों की देख भाल कर बहुत ख़ुशी मिलती है.

कहा गया है कि दूसरों को मदद करने के बाद बहुत ख़ुशी मिलती है. यह सत्य है. हाल फिलहाल ही मैंने इस बात को महसूस कि…

उनकी प्रेरणा मेरा संबल

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आज मैं बहुत उदास हूँ. पता नहीं क्यों ऐसा लग रहा था कि कुछ न करूँ. चुपचाप बैठी रहूँ. बच्चों को स्कूल भेज दिया था. पति भी अपने ऑफिस के काम से बाहर गए हुए थे. मन बेचैन हो रहा था. कुछ भी अच्छा नहीं लग रहा था. साँस की तकलीफ तो पहले से थी लेकिन उस दिन पता नहीं क्यूँ जैसे लग रहा था कि आज थोडा ज्यादा परेशान कर रहा है. अपने घर में अकेली चुपचाप बैठी थी. बड़े शहरों में सबसे बड़ा साथी टी वी होता है. टी वी ऑन किया. कभी सास बहू के सीरियल को ट्यून किया तो कभी कंप्यूटर चलाया. फेसबुक, ट्विटर सबको आजमा के देखा. लेकिन पता नहीं क्यों आज सब बेकार लग रहा था. मन में बहुत बुरे बुरे ख्याल आ रहे थे. मन आशंकित लग रहा था. पति भी बाहर ही थे. जीवन नीरस लग रहा था. इसी तरह के उलटे पुल्टे ख्याल मन में आये जा रहे थे. सोच रही थी क्या करूँ.


तभी मेरे दरवाजे पर लगी घंटी बजी. मैंने देखा कि दरवाजे पर मेरी सहेली मोना और गरिमा खड़ी हैं. मैंने जैस ही दरवाजा खोली, दोनों मुझसे लिपट गयी. What a pleasant surprise! मैंने कहा. मोना ने मुझे देखते ही कहा – क्या बात है तुम इतनी परेशान क्यों दिख रही हो? मैं झेप गयी और कहा – नहीं ऐसी कोई बात…

यादगार घर वापसी

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इस पोस्ट में मैं एक ऐसी यादगार घटना का जिक्र करना चाहती हूँ जो मेरे 
लिए हमेशा एक यादगार पल रहेगा. बात उन दिनों की है जब मेरी छोटी बहन को बिटिया हुई थी. जब उसका जन्म  कुंडली बनाया गया तो पंडित ने एक विशेष पूजा करने को कहा. मेरी बहन अलीगढ के पास रहती है. इसलिए उस पूजा में हमें जाना बहुत जरुरी था. पति को ऑफिस में छुट्टी नहीं मिली. वह भी नहीं आ सकते थे. बच्चों का स्कूल था, उनके एग्जाम आनेवाले थे, इसलिए वे भी नहीं आये. मुझे ही अकेले जाना पड़ा. क्या करती मैं तीन दिन के लिए बहन के यहाँ अलीगढ चली गयी.
पति ने आश्वासन दिया – कोई बात नहीं. तुम जाओ. मैं यहाँअपने घर में  सब सम्हाल लूँगा. जिसपर मुझे शंका थी. यह कैसे कर पायेंगे. क्या करती मैं चली गयी.
बहन के यहाँ बच्ची का नामकरण संस्कार हुआ. बहुत पूजा पाठ हुआ. गृह शांति के लिए पूजा-पाठ, हवन –यजन किया गया. मेरा तीन दिन तो बहन के पड़ोसियों के यहाँ जाने में, यहाँ वहां घुमने में ही बीत गया. जिस दिन मुझे वापस आना था उस दिन रविवार था. पति और बच्चे सभी घर पर ही थे. जब मैं गाड़ी से घर के पास उतरी तो अपने पति और बच्चे को वहां खड़ा पाया. वे मेरी प्रतीक्षा में खड़े …

मेहनत और भाग्य से घर का सपना पूरा हुआ

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जब भी मैं यह गाना सुनती कि एक बंगला बने न्यारा तो मन ही मन सोचती: ईश्वर
मेरे घर के सपना को कब पूरा करेंगे. किसी छोटे शहर में भी अपना एक घर होना बहुत बड़ी बात होती है. इसके लिए सबसे जरुरी है एकमुश्त बड़ी रकम, जो मेरे लिए बहुत मुश्किल था. घर का खर्च, बच्चों की पढाई बचत के नाम पर मात्र कुछ हजार होते थे. खैर, जब अन्य बहुत सारे लोगों को किराये के मकान में देखती तो मन को खुद ही संतोष दिलाती, ये लोग भी तो हैं, इनके पास भी तो अपना घर नहीं है. मेरे ही घर के सामने एक और परिवार रहता था. उस घर का आदमी फ़ोन पर ज़ोर से बातें करता था, यह बात ग्राउंड फ्लोर पर रह रहे मकान मालिक को पसंद नहीं आयी, घर खाली करने का फरमान दे दिया. कुछ मकान मालिक तो जूते-चप्पल गिना करते थे. मुझे भी कई बार मकान बदलना पड़ा.
एक दिन हमने मन में ठान लिया कि चाहे जो भी हो जाये अपना घर लेने की कोशिश करनी चाहिए. हमने घर के लिए एक बजट बनाया और घर सर्च करने लगी. कई घर देखे. कुछ तो पसंद नहीं आयी, कुछ के डॉक्यूमेंट पुरे नहीं थे. खैर जो होना होता है हो के ही रहता है. प्रथम प्रयास में एक घर पसंद आया लेकिन वह हमारे बजट में नहीं था. कोई तीन लाख…