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Showing posts from June, 2013

जीवन - कहाँ ?

तन विकलांग
मन विकलांग
धन विकलांग
तुम, मैं या वह ?
तन अतृप्त
मन अतृप्त
धन अतृप्त
स्थूल, सूक्ष्म या बाहय ?
तन विपन्न
मन विपन्न
धन विपन्न
दैहिक, दैविक, या भौतिक ?
तन रूग्ण
मन रूग्ण
धन रूग्ण
गाँव, नगर या राष्ट्र ?
तन मलिन
मन मलिन
धन मलिन
परमाणु, अणु या संसार ?
तन बुलन्द
मन बुलन्द
धन बुलन्द
आशा, जीवन या सृषिट ?
                           - पंकज कुमार

How to Become a Winner

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Look at the eight action steps. Follow these and become a winner.  1. Be a good finder. 2. Develop a habit of doing it now. 3. Develop an attitude of gratitude. 4. Get into a continuous education program. 5. Develop positive self-esteem. 6. keep yourself away from negative influences. 7. Learn to like the things that need to be done. 8. Always start your day with a positive.

Shri Ashokdham, Lakhisarai, Bihar

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Ashokdham  Shri Indra Madaneshwar Mahadev Temple in Ashokdham is a fomous and magnificent temple in Lakhisarai district in Bihar. People from every part of the country come here to worship Lord Shiva.


Ashokdaham in pictures
















Mochi Tola, Dularpur, Teghra, Begusarai

मोची टोला दुलारपुर दियारा में जब दुलारपुर गाँव के लोगों का वास था तो टोला से पश्चिम में एक पश्चिम टोला था जो नेपाल के नाम से जाना जाता है. वहां एक मोची टोला था जहाँ चमार जाति के लोगों का वास था. इस टोले में शिव मंगल मोची नाम के एक व्यक्ति थे जो काफी मिलनसार और सूझ बुझ वाले इंसान थे. उन्हें पंडारक से यहाँ बसने के लिए लाया गया था. समाज के हर वर्ग में उनको प्यार और प्रतिष्टा प्राप्त था. कटाव के बाद जब गाँव वर्तमान जगह पर आया तो इन्हें बाँध के उस पार मध्य विद्यालय नयाटोला के सामने बसाया गया. बाद में ये लोग पेठिया गाछी के पूर्वी तरफ भी बस गए. आज शिव मंगल मोची के परिवार में सैकड़ों पोते परपोते हैं. इन्ही के पोता शिवजी राम ( श्रम अधीक्षक), इंद्र देव राम (उद्योग विस्तार पदाधिकारी), आदि कई अन्य लोग सरकारी सेवाओं में हैं. मोची टोला, दुलारपुर  

Jayanti Gram, Dularpur, Teghra, Begusarai

जयंती ग्राम  दुलारपुर गाँव के दियारा क्षेत्र के सीमा से जुड़े ग्राम पंडारक और मेकरा से समय समय पर सीमा अतिक्रमण का कार्य होता रहता था. इसी के परिपेक्ष्य में सीमान को सुरक्षित रखने के लिए तहबल दुसाध के नेतृत्व में दुलारपुर मेकरा सीमान पर पासवान टोला बसाया गया था; उस समय दुलारपुर - आधारपुर का वास स्थान दियारा ही था. दुसाध जाति के लोग लड़ाका और जुझाडू लोग होते हैं. सीमान पर लड़ाई में इनकी महत्वपूर्ण भूमिका होती थी. दुसाध जाति में शौखी पासवान और बुधन पासवान दो भाई थे. दोनों बौने थे. शौखी दुसाध अच्छे मृदंगिया थे. जब गाँव में नाग पंचमी के दिन बिष हर माता की पूजा और शैलेश बाबा की पूजा ( शैलेश बाबा दुसाध के देवता हैं) होती थी तो भगत राम स्वरुप दास भगतै करते थे तथा शौखी मृदंग बजाते थे. बुधन पासवान छोटा भाई था. उनके दो पुत्र हुए - रामेश्वर पासवान और रामदेव पासवान. कहा जाता है कि दुलारपुर में सबसे पहला मैट्रिक पास रामेश्वर पासवान ही थे. बाद में उन्हें मोकामा घाट में रेलवे में नौकरी मिल गयी. रामदेव पासवान को पानी वाले जहाज में सारंग (ड्राईवर) लकी नौकरी मिली. अभी इन लोगों का परिवार बरौनी जंक्शन के …