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एक अपील 
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धन्यवाद सहित 

पंकज कुमार

Family Tree of Choudhary, Dularpur

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Here is the family tree of the Choudhary's  of Dularpur village.





हरिहरपुर वैद्यालय

यह टोला राजस्व ग्राम चक भीखन में स्थित है. यहाँ पर अधिक लोग शाकल्य दीपी ब्राह्मण हैं. इन लोगों का जाति पेशा लोगों का इलाज और आयुर्वेदिक दवाओं का निर्माण करना था. वैद्य मानिक चन्द्र मिश्र, श्यामल बिहारी मिश्र आदि प्रमुख वैद्य राज हुए. आज भी इनलोगों का परिवार इस कार्य से जुड़ा हुआ है. लोगों का कहना है कि यहीं के वैद्य गजाधर पाठक ने सिमरी बख्तियारपुर के नवाब की पत्नी को जानलेवा मियादी बुखार से बचाया था. नवाब ने इनको इसके बदले 300 बीघे की जागीर भेट दी थी. प्रभुनाथ मिश्र, भूपेंद्र बिहारी मिश्र, धीरेन्द्र मिश्र, दीनानाथ मिश्र, शम्भुनाथ मिश्र, सुनील कुमार मिश्र कई प्रमुख व्यक्ति यहीं के हैं.

रातगाँव बरारी

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तीन मुहानी से पश्चिम उत्तर गुप्ता बांध के उस पार रात गाँव बरारी स्थित
है. यहाँ मुस्लिम, राजपूत, ब्राह्मण, भूमिहार, वैश्य, पासवान आदि समुदाय के लोग रहते हैं. नवोदय क्लब रात गाँव वॉली बाल का क्लब है. यहाँ के युवक इसी परिसर में वॉली बाल का अभ्यास करते हैं. यहाँ टोला से सटा एक प्राथमिक विद्यालय है. राजेंद्र सिंह (भूटान में शिक्षक थे), इंदु कुमार सिंह, अनिल सिंह, गिरीश कुमार सिंह, आदित्य कुमार, रंधीर, सचिन इस टोले के कुछ प्रमुख लोग हैं.

सिमरबन्ना
वर्तमान में रात गाँव थाना नंबर ११५ बाउंड्री कमीशनर नंबर २८१ रेवेन्यू सर्वे नाम मिर्जापुर भीम को सिमरबन्ना कहा जाता है. यहाँ पर सिमल के बहुत पेड़ हुआ करते थे. अभी रात गाँव गुप्ता बाँध के दोनों तरफ बसा हुआ है जिसमे अधिकांश अनुसूचित जाति, पासवान और राजपूत लोग बसे हुए हैं. पासवान में ढोरहाय पासवान और चंचल भगत प्रसिद्द व्यक्ति हुए. राजपूत में श्री मिश्रीलाल सिंह, राम निहोरा सिंह , मुसो सिंह आदि प्रमुख व्यक्ति हुए. 
चोचवावन
कहा जाता है कि गुप्ता बाँध के पास स्थित तीन मुहानी से पश्चिम चोचवावन एक खाई नुमा स्थान है. बड़े बुजुर्गों का कहना है कि जब राष्टीय रा…

दुलारपुर के टोला

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दुलारपुर नया टोला पेठिया गाछी

जैसा कि पिछले पोस्ट में जिक्र हो चुका है कि दुलारपुर दियारा में १९५५ -५६ के कटाव के पहले दो टोला थे. धनिक लाल सिंह टोला और पत्ती राय टोला. १९५५ -५६ के कटाव के बाद सारी जमीन गंगा नदी में चली गई. लोगों के पास पुनर्वास की समस्या आ गई. ऐसी स्थिति में दोनों टोला के लोग संयुक्त रूप से नयानगर और रात्गओं करारी मौजे में आकर बस गए. नयानगर और तोखन सिंह टोला के बीच राष्ट्रीय राजमार्ग 28 से पूरब नया टोला आकर बस गया. नया टोला इसलिए कि नया आकर बसे थे और पेठिया गाछी इसलिए कि पहले यहाँ गाछी थी जिसके पश्चिमी कोने में प्रत्येक शनिवार को पेठिया यानि हाट लगता था.
खेल कूद दुलारपुर दियारा में ही धनिक लाल सिंह टोला और पत्ती राय टोला के युवक फुटबॉल खेला करते थे. उन दिनों दियारा में फुटबॉल की एक काफी अच्छी टीम हुआ करती थी. कटाव के बाद उसी परंपरा को आगे बढ़ाते हुए नयाटोला में श्री चंद्रदेव सिंह सुपुत्र अम्बिका सिंह ( पप्पू इंजीनियर के पिता) फूटबाल का खेल पेठिया गाछी परिसर में लगातार चलता रहा. जन्दाहा उच्च विद्यालय के प्रांगण में हुए फूटबाल मैच में यहाँ के खिलाडियों ने अपनी प्रतिभा …

दुलारपुर का टोला

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नयानगर 
जैसा कि पिछले पोस्ट में आपने पढ़ा कि मोती सिंह ने 300 बीघा जमीन अयोध्या नील कोठी के तत्कालीन कोठीवाल मार्शन से लीज पर लेकर नयानगर नाम से एक सूर्य मंडलाकार टोला बसाया था. बुजुर्गों का मानना है कि सूर्यमंडल में बास वाले स्थान पर धन से ज्यादा सरस्वती की वृद्धि होती है. इसके कई उदहारण हैं - बाबु रण बहादुर सिंह ( मोती सिंह के मौसेरा भाई और शिव कुमार के बाबा), उनके पुत्र ब्रज भूषण सिंह (रामायणी ), सुखदेव सिंह (गवैया), राम उचित सिंह (पहलवान, विधायक के चाचा), राम सहाय चौधरी, सबद चौधरी, रामेश्वर सिंह ( अतिथि सत्कार के लिए प्रसिद्द), राजेंद्र प्रसाद सिंह , राज्य सचिव, भाकपा, राम नरेश सिंह (ग्राम पंचायत पर्यवेक्षक), नन्ह्कुजी, मनोज कुमार (पी ओ), चंद्रदेव शर्मा (ओवरसियर), डॉ दिलीप कुमार शर्मा, दुलरुआ प्रसाद सिंह (फारसी के ज्ञाता ), रामजी सिंह, श्री नारायण शर्मा (अमीन), राजेंद्र प्रसाद सिंह (प्रधानाध्यापक ), मदनमोहन सिंह गाँधी(शिक्षक और समाजसेवी) आदि.
नयानगर का मौजे नंबर १२३ है. इसका बाउंड्री कमीशनर नंबर ३२८ और कलेक्टरी रजिस्टर नंबर ६१० है.
सांस्कृतिक उपलब्धियां नयानगर में नाट्य कला को जीवंत रू…