Feb 25, 2013

कामरेड चन्द्रशेखर सिंह, बीहट, बेगुसराय, बिहार

Comrade Chandrashekhar Singh

कामरेड चन्द्रशेखर सिंह का जन्म 26 दिसंबर 1915 को बेगुसराय जिला के बीहट ग्राम में एक खाते -पीते कृषक परिवार में हुआ था. उनके पिता स्वर्गीय राम चरित्र सिंह भूमिहार ब्राह्मण कॉलेज, मुजफ्फरपुर में एक demonstrator थे लेकिन 1920 में उन्होंने अपनी सरकारी नौकरी से इस्तीफा दे दिया और राष्ट्रीय आंदोलन में शामिल हो गए. वे कई बार जेल भी गए. इस प्रकार चन्द्रशेखर सिंह ने बचपन से ही एक राजनीतिक माहौल अपने घर में ही पाया और उसे देख - देख बड़े हुए.
श्री चन्द्रशेखर सिंह ने अपनी स्कूली शिक्षा पटना में प्राप्त की. मैट्रिक की परीक्षा पास करने के बाद उन्होंने बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय से स्नातक की उपाधि प्राप्त की. जब वे बीएचयू में पढाई कर रहे थे उसी समय श्री रुस्तम साटन जो एक वामपंथी और मार्क्सवादी कार्यकर्ता थे, के संपर्क में आये. श्री चन्द्रशेखर सिंह इनके प्रभाव में आकर प्रगतिशील और वामपंथी विचारधारा को अपने में आत्मसात कर लिया. बीएचयू से स्नातक होने के बाद वह उच्च शिक्षा के लिए पटना वापस आ गए. उन्होंने अपनी एमए अर्थशास्त्र की परीक्षा द्वितीय श्रेणी से उत्तीर्ण की. जब वह पटना में अध्ययन कर रहे थे तो वे प्रो ज्ञानचंद जो एक समाजवादी थे, के संपर्क में आये और उनसे भी काफी प्रभावित हुए. चन्द्रशेखर सिंह छात्र आंदोलन में कूद पड़े और बिहार प्रांत भर में एक बहुत सक्रिय नेता बन गए. वे एक ओजस्वी वक्ता थे और उनमें अदभुत सांगठनिक क्षमता थी.
अपनी एमए परीक्षा उत्तीर्ण करने के बाद उन्होंने पटना लॉ कॉलेज में दाखिला लिया और कॉलेज के छात्रावास में रहने लगे. अपने ब्रिटिश विरोधी भाषण और गतिविधियों के चलते वे सरकार के लिए भी खतरनाक बन गए थे, इसलिये 1940 में छात्रावास से उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया. उन्हें हजारीबाग जेल में एक राजनीतिक कैदी के रूप में रखा गया था. अब तक वह एक कम्युनिस्ट बन चुके थे. अदभुत भाषण कला की वजह से उनके भाषण भीड़ इक्कठी करने लगी. उन्हें हर तबके के लोग पसंद करते थे.
1967 में उन्होंने पहली गैर - कांग्रेसी सरकार में एक मंत्री के रूप में शपथ ली और बिहार में महत्वपूर्ण विभागों सिंचाई और उर्जा विभाग के मंत्री बने. वे एक बार फिर बाद में गैर - कांग्रेसी मंत्रालय में एक मंत्री बने और उन्हें कृषि विभाग सौंपा गया था. उन्होंने कई बार विदेश का भी दौरा किया.
उनकी शादी सारण जिले के गोराया कोठी गाँव में श्री नारायण प्रसाद सिंह की पुत्री से हुई. उनके पत्नी का नाम शकुंतला देवी था जो बाद में बरौनी विधान सभा से एम एल ए बनी. स्वर्गीय नारायण बाबू भी एक स्वतंत्रता सेनानी और केन्द्रीय परिषद के एक सदस्य थे. श्री चन्द्रशेखर सिंह के साला स्वर्गीय कृष्णकांत सिंह भी एक राजनीतिज्ञ थे जिन्होंने विभिन्न विभाग के मंत्री के रूप में बिहार की सेवा की थी.
19 जुलाई 1976 को पटना में चंद्रशेखर सिंह का निधन हो गया. उनके पुत्र स्वर्गीय प्यारे बाबू भी एक विचारक और चिन्तक थे. 1997 में मेरठ के पास एक कार दुर्घटना में उनका और उनके पत्नी की असामयिक मुत्यु हो गई.

Feb 17, 2013

प्रमुख व्यक्तित्व



हम अब प्रमुख व्यक्तित्व श्रृंखला में दुलापुर/तेघरा अंचल / बेगुसराय जिला के कुछ प्रमुख व्यक्तियों के बारे में चर्चा करना चाहेंगे. इस श्रृंखला में सबसे पहले व्यक्तित्व हैं:

श्री राजेंद्र प्रसाद सिंह, राज्य सचिव, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी, बिहार
  
श्री राजेंद्र प्रसाद सिंह का जन्म दुलारपुर नयानगर में हुआ था. इनके पिताजी का नाम श्री रामेश्वर प्रसाद सिंह था. जो एक बुद्दिजीवी किसान थे. श्री राजेंद्र प्रसाद सिंह को लोग राजो दा के नाम से बुलाते हैं. इन्होने अपने हाई स्कूल की परीक्षा जन्दाहा हाई स्कूल से पास की. इसके बाद कॉलेज में दाखिला लिया और स्नातक की परीक्षा पास कर ली. गार्हस्थ जीवन में सबसे पहले इन्होने जन वितरण प्रणाली में डीलर का कार्य शुरू किया जो इनके सार्वजनिक जीवन की पहली पाठशाला साबित हुई और इसके बाद इन्होने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा. सबसे पहले पंचायत में सरपंच के पद हेतु चुने गए और उसके बाद मुखिया बने. मुखिया रहते हुए इन्होने भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के विकास हेतु जी तोड़ मेहनत किया और कई सालों तक बेगुसराय जिला कम्युनिस्ट पार्टी के जिला सचिव रहे.

Rajendra Prasad Singh

1995 में 106 बरौनी विधान सभा (ध्यातव्य हो कि उस समय बरौनी विधान सभा ही था बाद में परिसीमन के चलते यह तेघरा विधान सभा बन गया ) से भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी ने राजो दा को अपना उम्मीदवार घोषित किया. इन्होने भाजपा के राम लखन सिंह को पराजित किया और बिहार विधान सभा के सदस्य बने.
2000 के चुनाव में भी इन्होने पुनः राम लखन सिंह को हराया.

फरवरी 2005 में हुए विधान सभा चुनाव में इन्होने लोक जनशक्ति पार्टी के प्रदीप राय को हराया.

पुनः अक्टूबर 2005 में हुए मध्यावधि चुनाव में भाजपा के सुरेन्द्र मेहता को पराजित किया.

इस प्रकार श्री राजेंद्र प्रसाद सिंह 1995 से 2010 तक लगातार 15 वर्षों तक बरौनी विधान सभा का प्रतिनिधित्व किया. इसके बाद पार्टी ने इन्हें और बड़ी जिम्मेदारी दी और आजकल ये भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी की बिहार राज्य के राज्य सचिव हैं, जो कि सिर्फ दुलारपुर गाँव, या तेघरा विधान सभा के लिए नहीं अपितु पूरे बेगुसराय जिले के लिए गौरव की बात है. श्री राजेंद्र प्रसाद सिंह को घुड़सवारी का बेहद शौक है. हिंदी और अंग्रेजी दोनोँ भाषा पर इनकी समान पकड़ है. आनेवाले दिनों में हो सकता है कि सीपीआई इनको कोई और भी बड़ी जिम्मेदारी दे. श्री राजेंद्र प्रसाद सिंह में अदभुत सांगठनिक क्षमता है जिसके कायल इनका एक -एक कार्यकर्ता है. सुदूर देहात से लेकर कार्यानंद भवन (सीपीआई का बेगुसराय जिला मुख्यालय ) के स्वीपर तक को ये नाम से जानते हैं जो इन्हें एक जमीनी नेता साबित करता है. इसलिए तो इन्हें दुलारपुर का धरतीपुत्र भी कहा जाता है. ऐसे इनकी सबसे अच्छी बात यह है कि अपने मुंह पर अपनी तारीफ इन्हें बिलकुल पसंद नहीं है.


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