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Showing posts from June, 2012

दुलारपुर दर्शन-23

दुलारपुर का चित्रनारायण महाल 



दुलारपुर गाँव की एक बेटी नरहन स्टेट में ब्याही गयी। कहा जाता हे कि बेटी के पिता ने दुलारपुर गाँव अपनी बेटी को दान स्वरूप उसके खोइछे में दिया था। परन्तु खेतों में कृषि कार्य पिता ही करते आ रहे थे। जब नरहन स्टेट वालों ने अपनी जमीन दखल करना चाहा तो दुलारपुर के लोगों को ऐतराज हुआ और नरहन के लोगों को खेत पर से भगा दिया गया।


परन्तु कागजी मामलें मं नरहन के लोग ही सही थे। उन लोगों ने कानूनी प्रक्रिया शुरू की, तथ्य नरहन के कुछ लोगों ने प्रशासन के कहने पर दुलारपुर जाकर अपनी जमीन दखल करनी चाही। वे करीब सौ लोग नरहन से आकर वर्तमान बाया नदी के इस पार दी अपना छावनी लगाया। वे लोग अगले सुबह में खेत पर छावा बोलने जाते। राहगीरों के द्वारा दियारा में बसे दुलारपुर के लोगों को इन सारी बातों की जानकारी मिली। अतः गाँव के एक तेज एवं साहसी आदमी को वहाँ वहाँ उनके पास भेजा। वह आदमी घोड़े पर चढ़कर छावनी के बगल से ही गुजरा। वहाँ छावनी के लोगों ने उसे बुलाया और पुछा क्या तुम दुलारपुर गाँव से आ रहे हो? उसने कहा - क्या यह बताओगे कि दुलारवासी हम लोगों के आने की खबर जानते हैं। उसने कहा - ह…

Dularpur Darshan - 22

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Seven wonders of Patna Patnaites have traditionally had an emotional sense of belonging. By participating overwhelmingly in the Seven Wonders of Patna, you have confirmed our conviction that landmarks in a city are more than just cultural or historical artefacts, that they anchor us to our Universe, help us build a sense of community and a unique identity.

Over the past few days we presented to you 14 fascinating stories about well-known and not-so-well-known landmarks in the city. They included monuments, bridges, places of worship and even a Biological Park. The response was fantastic, reaffirming our belief that the majority of Patnaites are committed stakeholders in our city. Eventually, the Seven Wonders of Patna were decided through your SMS and website votes, and we are happy to present the final list to you. Golghar
Golghar, a single dome structure built in the native Stupa architecture, is a unique architectural wonder. This massive and bulbous beehive of a granary was built in…

Dularpur Darshan -21

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Arun Praksh ( अरुण प्रकाश )




जन्म : 22फरवरी1948 में बेगूसराय (बिहार) जिला के निपनियां गाँव में।
शिक्षा : स्नातकप्रबंध विज्ञान और पत्रकारिता में स्नातकोत्तर डिप्लोमा। प्रकाशित कृतियाँ : कहानी-संग्रह : भैया एक्सप्रेस,जलप्रांतर, मँझधारकिनारे, उस रात का दुःख, लाखों के बोल सहे,विषम राग आदि... आलोचना : गद्य की पहचान  उपन्यास : कोंपल कथा कविता-संकलन : रक्त के बारे में अनुवाद : अंग्रेजी से हिंदी में विभिन्न विषयों की आठ पुस्तकों के अनुवाद। अनुभव : अखबारों व पत्रिकाओं कासंपादन। खासकरसाहित्य अकादमी की पत्रिका'समकालीन भारतीय साहित्य' का कई  वर्षों तक संपादन।कई  धारावाहिकों,वृत्त चित्रों तथा टेली-फिल्मों के लिए लेखन से संबद्ध रहे, कई स्तंभों के लिए भीलेखन। प्राय: एक दशक से कथा-समीक्षा और कथेतर-गद्यों की आलोचना में सक्रीय थे। अनेक राष्ट्रीय स्तर की संगोष्ठियों में सहभागिता। सम्मान : साहित्यकार सम्मान, हिंदी अकादमी; दिल्ली, कृति पुरस्कार, हिंदी अकादमी; दिल्ली, रेणु पुरस्कार, बिहार शासन, दिनकर सम्मान, सुभाष चन्द्र बोस कथा-सम्मान, कृष्ण प्रताप स्मृति कथा पुरस्कार सहित कई सम्मानों से सम्मानित।
निधन : 18…

Dularpur Darshan -20

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एक कहानी नहीं पूरा शोध प्रबंध है 'भैया एक्सप्रेस'

अरुण प्रकाश चले गए यूं लगा मानो भैया एक्सप्रैस पंजाब पहुंचने से पहले ही अकस्मात दुघर्टनाग्रस्त हो गया हो। उस पर सवार रामदेव अब कैसे अपने भैया विशुनदेव को खोज कर लाएगा। नवब्याही भौजी कब तक इंतजार करती रहेगी। माई कब तक कनसार में अनाज भूनकर,सत्तू पिसकर पंडितजी से लिए कर्ज का सूद भरती रहेगी। कम से कम मुझे तो यह आशा जरूर थी की अरुण प्रकाश अपने जीवन में ही पुरबियों जिसमें बिहार पूर्वी उत्तर प्रदेश, बिहार,  झारखंड आदि के गरीब मजदूरों के साथ अन्य राज्यों में पंजाब, हरियाणा, महाराष्ट्र और उत्तर पूर्वी राज्यों में अन्याय बंद हो जाएगा। पर नहीं आज भी लाखों मजदूर अन्य प्रदेशों में रोजी-रोजगार के लिए जानवरों की भांति अनेक भैया एक्सप्रैस रेलगाड़ियों में ठुंसे चले जा रहे हैं। अमानवीय स्थितियों में काम करने को मजबूर हैं। उनका शोषण घर में निकलने के साथ जो शुरु होता है वह रेल के जनरल डब्बों में टिटियों, भेंडरों, हिजडों, कुलियों, पॉकेटमारों से लेकर जिस-जिस व्यक्तियों से साबका पड़ता है सब लूटता है। सामान्य शहरी बाबूओं को तो उनको देखते ही उबकाई आती है…

Dularpur Darshan-19

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अरुण प्रकाश के अप्रकाशित उपन्यास का अंश
अरुण प्रकाश ने मिथिला-कोकिल विद्यापति के जीवन को आधार बनाकर एक उपन्यास लिखा था. जिन दिनों मैं ‘बहुवचन’ का संपादन कर रहा था उसका एक अंश भी ‘बहुवचन’ के ११ वें अंक में प्रकाशित किया था. लेकिन पता नहीं क्यों उन्होंने इस उपन्यास को प्रकाशित नहीं करवाया. असल में, अरुण प्रकाश जी परफेक्शनिस्ट थे. जब तक अपनी किसी रचना से पूरी तरह संतुष्ट नहीं हो जाते थे उसे प्रकाशित नहीं करवाते थे. ‘पूर्वराग’ नामक उस उपन्यास की एक हलकी-सी झांकी लेते हैं।


पूर्व राग
श्रृंगार में पूर्व राग होता है. विद्यापति न केवल पूर्व राग के कवि थे बल्कि वे पूर्वी प्रदेशों के राग भी थे. असमिया, ओडिया, बांग्ला और नेपाली भाषाओं में विद्यापति के पद हैं तो कई भाषाओं में उनका प्रभाव लक्षित होता है. धार्मिक मार-काट के उस दौर में वैष्णव संप्रदाय ने पूर्वी भारत की लहुलूहान आत्मा पर कोमल फाहा रखा था और उसके रस थे विद्यापति. इस उपन्यास में विद्यापति के सारे अंतरंगों के भाष्य हैं. इस प्रस्तुति में मिथिला के पक्षधर जयदेव का भाष्य है, जो आपबीती के साथ जगबीती भी सुनाते हैं.
पक्षधर भाष्य
मेरी ख्याति इस रूप म…

Dularpur Darshan-18

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‘पैन इंडियन राइटर’ थे अरुण प्रकाश


परंपरा और आधुनिकता के संगम के अपूर्व शिल्‍पी, संवेदना से लबरेज और भारतीय समाज की गहरी जातीय चेतना के विशिष्‍ट चितेरे अरुण प्रकाश का हमारे बीच से यूं चले जाना हिंदी साहित्‍य के लिए प्रचलित अर्थों में रस्‍मी किस्‍म की अपूरणीय क्षति नहीं है, बल्कि सही मायनों में देखा जाए तो ऐसी क्षति है, जिसकी भरपाई मौजूदा हालात में दूर-दूर तक दिखाई नहीं देती। मैंने उन्‍हें एक सिद्धहस्‍त कथाकार ही नहीं वरन ऐसे कई रूपों में देखा-जाना है, जिन्‍हें समझे बिना असली अरुण प्रकाश को नहीं जाना जा सकता। अरुणजी हिंदी की लुप्‍त होती मसिजीवी परंपरा के विरल लेखकों में थे, जिन्‍होंने पूरा जीवन ही लेखनी के बल पर जीया। और वैसा जीवन बहुत कम लेखकों ने जीया होगा, जिसमें कभी किसी के पास न तो वे काम मांगने गये और ना ही अपनी विपन्‍नता का कभी रोना रोया। स्‍वाभिमानी लेखन की ऐसी मिसाल दुर्लभ ही मिलती है। उनकी जिंदादिली और उन्‍मुक्‍तता ऐसी थी कि कोई उस नारियल जैसे रूखे-सूखे खांटी व्‍यक्तित्‍व के भीतर छिपे कोमल श्‍वेत संसार में यदा-कदा ही दाखिल हुआ होगा और उनकी अपनी संघर्ष गाथा से परिचित हुआ होगा। उ…

Dularpur Darshan -17

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नहीं रहे 'भैय्या एक्सप्रेस' के सर्जक अरुण प्रकाश


नई दिल्ली: हिन्दी के वरिष्ठ साहित्यकार, पत्रकार और ख्यातिनाम लेखक अरुण प्रकाश का लम्बी बीमारी के बाद आज नई दिल्ली में निधन हो गया। वह  ६४ वर्ष के थे। प्रबंध विज्ञान के अंगरेजी माध्यम के छात्र होते हुए भी अरुण प्रकाश ने हिन्दी लेखन को अपनी आजीविका के साथ-साथ अपने हुनर को अभिव्यक्त करने का माध्यम बनाया और उसमें वे बखूबी सफल रहे।




अंगरेजी से हिन्दी में उम्दा अनुवाद के लिए भी उन्हें बार -बार सराहा गया । राष्ट्रीय सहारा अखबार से कमलेश्वर जी के अनुरोध पर पत्रकारिता की यात्रा शुरू करने वाले अरुण प्रकाश उन चुंनिंदा लोगों में शुमार हैं, जिन्होंने हिन्दी की सेवा के लिए सरकारी नौकरी ठुकरा दी और संघर्ष की राह चुनी।

अरुण प्रकाश का जन्म १९४८ में बिहार के बेगूसराय में हुआ़ था। उन्होंने स्नातक प्रबंध विज्ञान और पत्रकारिता में स्नातकोत्तर डिप्लोमा की शिक्षा हासिल की थी. पर किताबी ज्ञान से इतर अपने आस पास के लोगों और सामाजिक चहल-पहल और गतिविधियों पर पैनी नजर ने उनके लेखन को एक अलग तेवर और धार दी । अपने लेखकीय जीवन में यों तो उन्होंने ढेरों रचनाएँ लि…

Dularpur Darshan-16

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कथाकार अरुण प्रकाश का लंबी बीमारी के बाद निधन
नई दिल्ली।।18 June 2012 हिन्दी के जाने-माने कथाकार अरुण प्रकाश का सोमवार को लंबी बीमारी के बाद निधन हो गया। वह करीब 64 वर्ष के थे।


सूत्रों ने बताया कि प्रकाश का सोमवार को दोपहर करीब एक बजे दिल्ली के पटेल चेस्ट अस्पताल में निधन हो गया। वह यहां काफी लंबे समय से सांस की बीमारी का इलाज करा रहे थे। अरुण प्रकाश का जन्म 18 जुलाई 1948 को बेगूसराय (बिहार) के निपनिया  गांव में हुआ था। उनके परिवार में पत्नी, एक बेटी और एक बेटा है। प्रकाश को बतौर कथाकार 'भइया एक्सप्रेस' से पहचान मिली। उनकी प्रमुख रचनाओं में 'मझधार किनारे', 'जलप्रांतर', 'विषमराग' और 'लाखों के बोल सहे' (कहानी संग्रह), 'कोपल कथा' (उपन्यास), 'रात के बारे में' (काव्य संग्रह) और 'हिन्दी के प्रहरी रामविलास शर्मा' (आलोचना) शामिल हैं।

अरुण प्रकाश ने दूरदर्शन की बहुचर्चित टीवी सांस्कृतिक पत्रिका 'परख' के करीब 450 एपिसोड लिखे थे और वह साहित्य अकादमी की साहित्यिक पत्रिका 'समकालीन भारतीय साहित्य' के संपादक रहे। उन्हें क…

दुलारपुर दर्शन-14

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Change in Bihar


                Source: Outlook




दुलारपुर दर्शन-13

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संसद से सड़क तक संघर्ष का ऐलान
वाम एकता को मजबूत किया जाएगा और सूबे के सुलगते सवालों को लेकर जबरदस्त आंदोलन छेड़ा जाएगा। संसद से लेकर सड़क तक पर भाकपा संघर्ष करेगी। उक्त बातें भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (भाकपा) के नव निर्वाचित राज्य सचिव कामरेड राजेंद्र प्रसाद सिंह ने रविवार की दोपहर स्थानीय कार्यानंद भवन में आयोजित संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए कही। राज्य सचिव ने कहा कि आने वाले दिनों में पार्टी भूमिसंघर्ष को तेज करेगी। बिजली, पानी के मुद्दे को लेकर भी सड़क पर उतरेगी। उन्होंने संवाददाता सम्मेलन में वाम-जनवादी एकता पर बल दिया। वहीं, एक सवाल के जवाब में कहा कि निकट भविष्य में लालू-रामविलास के साथ चुनावी गठजोड़ की कोई उम्मीद नहीं है। संवाददाता सम्मेलन में मौजूद पूर्व सांसद व वरीय नेता शत्रुघ्न प्रसाद सिंह ने भी कुछ ऐसे ही संकेत दिए। इधर, संवादाताओं को संबोधित करते हुए राज्य सचिव राजेंद्र प्रसाद सिंह ने कहा कि पंचायतों में व्याप्त भ्रष्टाचार को लेकर भी पार्टी संगठित आंदोलन चलाएगी। पार्टी गांवों की ओर रूख करेगी। उन्होंने नारा दिया- पार्टी बढ़ाओ, पार्टी को फैलाओ। हालांकि, उन्होंने प…