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Showing posts from February, 2012

दुलारपुर दर्शन - 8

दुलारपुर गाँव के विभिन्न पंचायतों का गठन
स्वतंत्रता प्राप्ति के पूर्व हमारे राजनेताओं ने यह संकल्प लिया था कि जब हमें आजादी मिलेगी , हमारी अपनी संपभुता होगी तो गाँवों में हम पंचायती राज का गठन करेंगे, जो पंचायत प्रणाली हमें अपनी पूर्वजों   से विरासत के रूप में मिली है। चूँकि भारत की आत्मा गाँव में बसती है। इसी आलोक में 10 दिसम्बर 1950 को  गाँव के प्रमुख व्यक्तियों,  क्षेत्र के स्वतंत्रता सेनानी एवं तत्कालीन काँगेसी नेताओं ने आधारपुर  में ऐतिहासिक अशोक वृक्ष की छाँव तले एक आम सभा के द्वारा आधारपुर नाम से ही एक गैर सरकारी पंचायत का गठन किया था। उस बैठक में प्रमुख लोगों में तारणी प्र. सिंह (बजलपुरा), मौजी कुंवर (अयोध्या), बलदेव सिंह (बीहट) तथा रामरक्षा शर्मा ( मधुरापुर ) शामिल थे, जिसमें सर्वसम्मति से क्रमशः  श्री रामफल सिंह ( मुखिया ) तथा श्री देवनायण सिंह (सरपंच) चुने गये।
तत्पश्चात् 10 अप्रल 1952 को बिहार सरकार के तत्कालीन स्वायत्त शासन विभाग द्वारा बिहार गजट में पंचायत गठन की विधिवत सूचना हुई तथा अगस्त 1952 में सरकार की देखरेख में पुनः रामफल सिंह (मुखिया) एवं देवनारायण सिंह (सरपंच) नि…

Dularpur Darshan -7

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Dularpur is a big village in Begusarai district of Bihar. It is in Teghra sub division of Begusarai district. Dularpur covers a land area of about 36000 bighas. People of different casts live together happily. The economy of this village mainly depends of agriculture. The land of Dularpur Diyara is very fertile. The main crops include wheat, maize, coriander, wokla -a pulse, mustard, arhar, etc. Dularpur is also famous for Dularpur Math. National Highway-28 passes from this village. Nearest railway stations are Barauni, Teghra and Bachhawara. Indian Oil Corporation , Hindustan Fertilizer Limited , Barauni Thermal Power Station and many other industries lie 8-10 km away from this village.

दुलारपुर दर्शन -6

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दुलारपुर का भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में योगदान जिसको न निज गौरव, न निज देश का अभिमान है।                             वह नर नहीं, नर-पशु निरा मृतक समान है।। माँ भारती दासता की जंजीर में जकड़ी हुई थी। खुदीराम बोस मुज्जफरपुर जेल में फाँसी पर लटकाये जा चुके थे। प्रफुल्लचन्द चाकी ने मोकामा  में अग्रेजों की क्रूरता के भय से खुद गोली मार ली थी। देश में वन्दे मातरम और जयहिन्द के नोर की अनुगूँज सर्वत्र सुनाई देती थी। जलियाँवाला बाग की त्रासदपूर्ण घटना की चीख-पुकार सर्वत्र सुनाई दे रही थी।



बलिदान की इस बेला में दुलारपुर की माटी ने अपने बेटों से आहवान किया कि हे दुलारपुर के वीर सपूतों! तुझे माटी का मोल चुकाना पड़ेगा। तेघड़ा थाना काँगेस समिति का गठन किया गया। बजलपुरा के भाई जोगी लाल सिंह इसके अध्यक्ष  बनाये गये और दुलारपुर के रघुनाथ ब्रह्मचारी उसके मंत्री । संगठन का कार्यक्रम तेजी से चलने लगा । हर गाँव में सक्रिय कार्यकर्ता  बनने लगे। 1920 के दिसम्बर महीने में भी कृष्ण  सिंह तेघड़ा आये। तेघड़ा गोरियारी पर काँगेस की महती सभा हुई । दुलारपुर के हरेख सिंह, गंगा सिंह, सूर्यनारायण सिंह (डॉक्टर  साहेब …